चिली में राष्ट्रपति द्वारा गठित सलाहकार आयोगों की भूमिका समय के साथ महत्वपूर्ण रूप से बदली है। पहले इन्हें राजनीतिक कमजोरी के संकेत के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब ये दीर्घकालिक समझौतों के निर्माण का पसंदीदा तंत्र बन गए हैं। 2006 में मिशेल Bachelet द्वारा गठित आयोग से लेकर वर्तमान में सार्वजनिक रोजगार के आधुनिकीकरण के लिए आयोग तक, इस बदलाव का विश्लेषण किया गया है। मुख्य चुनौती सार्वजनिक रोजगार के नियमों को लचीला बनाना है, साथ ही नौकरी की सुरक्षा और श्रम संहिता द्वारा मान्यता प्राप्त अधिकारों को बनाए रखना भी आवश्यक है। लेखक का तर्क है कि समस्या अब निदान करने में नहीं, बल्कि उन्हें ठोस राजनीतिक सहमति में बदलने में है। इन आयोगों के माध्यम से सरकार विभिन्न हितधारकों के बीच आम सहमति बनाने का प्रयास कर रही है।

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