चिली में 1986 में हुई दो और तीन जुलाई की ऐतिहासिक हड़ताल को 40 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह हड़ताल ‘असेंब्ली ऑफ सिविलिटी’ द्वारा “सब एक साथ और एक ही समय पर” के नारे के साथ बुलाई गई थी, और चिली के हालिया इतिहास में सबसे बड़ा और संगठित आंदोलन था। क्रिस्टोबाल कार्ले इस अवसर पर उस संकट और दमन के माहौल का विश्लेषण करते हैं जिसने इस हड़ताल को संभव बनाया। लेख में हड़ताल की विफलता के कारणों और उसके बाद आए रणनीतिक बदलावों पर भी प्रकाश डाला गया है। इन बदलावों का प्रभाव आज भी चिली के नागरिक समाज संगठन पर महसूस किया जाता है। यह हड़ताल चिली के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी, जिसने नागरिक एकजुटता की शक्ति और सीमाओं दोनों को प्रदर्शित किया। इस घटना का अध्ययन चिली के सामाजिक और राजनीतिक विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।