यह लेख लेखक की बचपन की यादों पर आधारित है, जिसमें वे अपने माता-पिता के साथ रास्तों के चैपल की वार्षिक तीर्थयात्रा पर जाते थे। यह तीर्थयात्रा एक वार्षिक परंपरा थी जिसमें सैर, प्रार्थना और भोजन शामिल था। लेखक ने इस यात्रा के दौरान बिताए समय को याद किया है और इसे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। यह तीर्थयात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती थी, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच संबंधों को मजबूत करने का भी एक अवसर थी। चैपल में प्रार्थना करने के बाद, परिवार एक साथ भोजन का आनंद लेता था, जिससे यात्रा और भी यादगार बन जाती थी। यह लेख अतीत की एक सरल और सुखद स्मृति को दर्शाता है। यह तीर्थयात्रा लेखक के बचपन का एक अभिन्न अंग थी और आज भी उनके दिल में बसी हुई है।