मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) की एक टिप्पणी को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। हाल ही में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई पर उनकी टिप्पणी को लेकर भ्रम पैदा किया गया था। वायरल हो रहे संदेशों में दावा किया गया था कि मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उनके पास वीडियो देखने का समय नहीं है। हालांकि, यह दावा गलत पाया गया है और इसे गलत सूचना के रूप में उजागर किया गया है। इस मामले ने न्यायपालिका और मीडिया रिपोर्टिंग के बीच जवाबदेही के सवाल खड़े कर दिए हैं। इस गलत सूचना को फैलाने वालों की पहचान करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की जा रही है। यह घटना मीडिया में तथ्यों की जांच और सटीक रिपोर्टिंग के महत्व को दर्शाती है।