भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने एक नागरिक प्रदर्शनकारी को नोटिस भेजने के लिए ग्रेटर नोएडा के एक मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार लगाई है। यह नोटिस नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में प्रदर्शन करने वाले एक शख्स को भेजा गया था। मुख्य न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट के इस कदम को “गुस्ताखी” करार दिया और सवाल किया कि अधिकारियों को विरोध प्रदर्शनों के जवाब में इस तरह की कार्रवाई करने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है। अदालत ने मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगा है और मामले की अगली सुनवाई तक आगे कोई कार्रवाई करने से रोक लगाई है। इस घटना ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाता है। मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी का उद्देश्य अधिकारियों को नागरिकों के अधिकारों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाना है।