जर्मन वैज्ञानिकों ने 1986 में चेर्नोबिल दुर्घटना के बाद निकले ईंधन के अवशेषों की जांच की है। उन्होंने पाया कि कुछ कणों में यूरेनियम के यौगिक बने हुए हैं। यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि ये यौगिक रेडियोधर्मी सामग्री के वातावरण में फैलने की गति को धीमा कर सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह चेर्नोबिल के आसपास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इन कणों की क्रिस्टलीय संरचना लगभग 40 वर्षों के बाद भी बरकरार है, जो आश्चर्यजनक है। वैज्ञानिकों ने इस पर और अधिक शोध करने की योजना बनाई है ताकि यह समझा जा सके कि ये यौगिक कैसे बने और वे कितने स्थिर हैं। यह अध्ययन परमाणु दुर्घटनाओं के परिणामों को समझने में मदद कर सकता है।