स्पेन के सेउटा में लगभग 60,000 लोगों की अचानक आवाजाही सिर्फ एक सीमा संकट नहीं थी, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे यूरोप को प्रवासन के माध्यम से दबाव में लाया जा सकता है। यह घटना यूरोप में प्रवासन, शेंगेन क्षेत्र और सीमा सुरक्षा पर एक परिचित बहस शुरू कर रही है। लेखक का तर्क है कि यूरोप अब इस मुद्दे को केवल नैतिक दृष्टिकोण से नहीं देख सकता। सेउटा की घटना ने यूरोप की सुरक्षा में एक गंभीर कमजोरी उजागर की है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह संकट इंगित करता है कि बाहरी ताकतें यूरोप को अस्थिर करने के लिए प्रवासन का उपयोग कर सकती हैं। यूरोप को अपनी सीमाओं की सुरक्षा और इस तरह के दबावों का सामना करने के लिए तत्काल रणनीति विकसित करने की आवश्यकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए एक नए, अधिक रणनीतिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

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