भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में प्रगति की गति धीमी है, वहीं संबंधों को और खराब करने की कोशिशें बढ़ रही हैं। हाल की कुछ घटनाओं और कुछ हलकों की प्रतिक्रियाएं दर्शाती हैं कि संबंध सुधार के लिए ठोस कदम उठाना भी जोखिम भरा माना जा सकता है। प्रधानमंत्री के सूचना, नीति और रणनीति सलाहकार जाहेद उर-रहमान से जुड़ी हालिया घटना इसका उदाहरण है। इस घटना ने दोनों देशों के बीच अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ निहित स्वार्थों द्वारा जानबूझकर तनाव उत्पन्न किया जा रहा है। यह स्थिति दोनों देशों के लिए हानिकारक है, जो आपसी सहयोग और विकास में विश्वास रखते हैं। दोनों सरकारों को इस स्थिति को संभालने और संबंधों को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।