घाना कैथोलिक बिशपों के सम्मेलन ने घाना शिक्षा सेवा (GES) परिषद से अपने प्रतिनिधि को हटाने की कड़ी आलोचना की है। बिशपों का तर्क है कि इस निर्णय से शिक्षा संबंधी महत्वपूर्ण चर्चाओं में उनकी भूमिका कम हो गई है। उनका मानना है कि यह कदम वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में अनुशासन बनाए रखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। बिशपों ने इस फैसले पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्हें पहले चर्चाओं से बाहर रखा गया और अब अनुशासनहीनता के लिए दोष दिया जा रहा है। यह निर्णय धार्मिक संगठनों के शिक्षा नीति पर प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाता है। बिशपों ने GES परिषद में अपनी भागीदारी के महत्व पर जोर दिया है और भविष्य में समावेशी निर्णय लेने की प्रक्रिया की वकालत की है। उनका कहना है कि सभी हितधारकों को शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करना चाहिए।