कैथरीन हैरिस के पिता को कोकोडा ट्रैक पर दो दिनों तक ‘फजी वज़ी एंजल्स’ ने सहारा दिया था। उनके पिता, थियो रॉसी, द्वितीय विश्व युद्ध से वापस लौटने के बाद युद्ध के भयावह अनुभवों के बारे में बात करने से कतराते थे, लेकिन कोकोडा की कहानी उन्होंने अपनी बेटी, कैथरीन हैरिस को सुनाई। कोकोडा ट्रैक पर सैनिकों के लिए परिस्थितियाँ बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण थीं, जहाँ बीमारी, मलेरिया, पेचिश और भुखमरी आम बात थी। कैथरीन हैरिस अब पीएनजी के लिए एक अग्रणी खिलाड़ी के रूप में उभरी हैं, और वह नेशनल रग्बी लीग (एनआरएल) में बदलाव ला रही हैं। यह कहानी युद्ध के इतिहास और खेल में प्रतिनिधित्व के महत्व को जोड़ती है। हैरिस का कार्य पीएनजी के लिए एक प्रेरणा है और एनआरएल में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। यह पोस्ट 'पोस्ट कुरियर' में प्रकाशित हुई है।