कार्डिनल डेविड ने सहनशीलता को एक सीमा तक ही उचित बताया है। उनका मानना है कि लगातार बुराई को सहन करते रहने से केवल बर्दाश्त करने की आदत पड़ती है, और बदलाव की कोई संभावना नहीं रहती। कार्डिनल ने स्पष्ट किया कि सहनशीलता का अर्थ भ्रष्टाचार और अक्षमता को स्वीकार करना नहीं है। उन्होंने इसके बजाय, नैतिक साहस और सक्रिय विरोध पर जोर दिया। उनका संदेश यह है कि जब सहनशीलता निष्क्रियता में बदल जाती है, तो वह हानिकारक हो सकती है। समाज को बेहतर बनाने के लिए, हमें निष्क्रिय रूप से पीड़ित बनने के बजाय, अन्याय के खिलाफ खड़े होना चाहिए। कार्डिनल डेविड का यह वक्तव्य, वर्तमान परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

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