फ्लाईदुबई के कप्तान, मचछर, ने भारत के प्रधानमंत्री से बात करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने विमान को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली। उन्होंने बताया कि सह-पायलट के साथ हुई झड़प में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, वे जानते थे कि उन्हें कार्रवाई करनी होगी। मचछर ने बताया कि उन्हें यह अहसास था कि विमान को सुरक्षित रखना उनकी जिम्मेदारी है, भले ही उनकी अपनी हालत खराब हो। उन्होंने अपनी चोटों के बावजूद विमान को सुरक्षित रूप से उतारने के लिए हर संभव प्रयास किया। इस घटना ने मचछर की बहादुरी और दृढ़ संकल्प को दर्शाया है। प्रधानमंत्री ने कप्तान के साहस की सराहना की और उन्हें सम्मानित किया। मचछर की यह कहानी साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है।

English
Français
Español
हिन्दी
中文