न्यूज़रूम के एक लेख के अनुसार, सबसे धनी लोग अपने कर-मुक्त आय का अधिकांश हिस्सा आवासीय किराये की संपत्ति से नहीं, बल्कि व्यवसायों के माध्यम से प्राप्त करते हैं। पूंजीगत लाभ कर अब बहस को एक नए मोड़ पर ले जा रहा है। पहले यह बहस बार-बार एक ही मुद्दे पर अटकी रहती थी। यह कर उन लोगों पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है जो अपनी संपत्तियों को बेचकर लाभ कमाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम धन असमानता को कम करने में मदद कर सकता है। यह कर नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है, जो आय के स्रोतों पर अधिक ध्यान देगा। इस बदलाव से कर प्रणाली को और अधिक न्यायसंगत बनाने की उम्मीद है।

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