विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूलों में हमलों की साजिशों के जवाब में अत्यधिक सुरक्षा उपायों को लागू करने से डर का सामान्यीकरण हो सकता है। हालांकि युवा आत्म-कट्टरपंथीकरण का पता लगाने और उसे रोकने की प्रणाली अब तक सफल रही है, फिर भी इसमें सुधार की आवश्यकता है। कट्टरपंथीकरण के मार्ग अब छोटे होते जा रहे हैं और अधिक माध्यमों से फैल रहे हैं। इसलिए, बदलते खतरों के अनुरूप प्रणाली को विकसित करना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा उपायों को प्रभावी होने के साथ-साथ छात्रों के लिए सुरक्षित और सामान्य वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता है। अति-सुरक्षा उपायों से छात्रों में चिंता और भय की भावना पैदा हो सकती है, जो उनके सीखने और विकास को बाधित कर सकती है। सुरक्षा और कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।