मॉरिस कामतो ने 27 जुलाई 2026 को कैमरून के बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों की भूमिका पर खुलकर आलोचना की है। उन्होंने देश की वर्तमान स्थिति के प्रति उनकी चुप्पी और अस्पष्ट रुख पर सवाल उठाए हैं। कामतो का मानना है कि बुद्धिजीवियों को सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से आवाज उठानी चाहिए। वे देश के विकास और लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनकी आलोचना कैमरून में बौद्धिक वर्ग की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर बहस को जन्म दे सकती है। कामतो के विचारों से देश में एक नई चर्चा शुरू होने की संभावना है। यह टिप्पणी वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप मानी जा रही है।