कैमरून के मानवाधिकार वकील अगबोर बल्ला ने हाल ही में राष्ट्रीय सभा में हुए नामांकन में अंग्लोफोन समुदाय के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अंग्लोफोन समुदाय को शामिल करना एक नियमित प्रक्रिया होनी चाहिए, न कि अंतिम समय में केवल दिखावे के लिए किया गया कार्य। बल्ला ने इस मुद्दे पर एक लेख प्रकाशित किया है, जिसमें उन्होंने समावेशी प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका तर्क है कि राजनीतिक संस्थानों में सभी समुदायों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अंग्लोफोन समुदाय को अक्सर हाशिए पर धकेल दिया जाता है और उनकी आवाज को अनसुना कर दिया जाता है। बल्ला का मानना है कि वास्तविक समावेश के लिए, अंग्लोफोन समुदाय को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर आगे चर्चा और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।