2025 की गर्मियों में कंबोडिया-थाईलैंड सीमा पर आर्टिलरी हमले और F-16 हवाई हमलों ने गंभीर हिंसा पैदा कर दी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे केवल एक सामान्य 'सीमा तनाव' के रूप में देखा, लेकिन कंबोडियाई नागरिकों के लिए यह कुछ और ही था। कंबोडिया का मानना है कि यह उनके क्षेत्र में घुसपैठ और सैन्य अतिक्रमण का एक पुराना और दोहराया जाने वाला पैटर्न है। लंबे समय तक धैर्य रखने के बावजूद, अब सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने स्थिति को और नाजुक बना दिया है। यह विवाद केवल जमीन के एक टुकड़े का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता और आत्म-सम्मान का मुद्दा बन गया है। कंबोडिया के लिए अब इस निरंतर हो रहे अतिक्रमण को नजरअंदाज करना संभव नहीं रह गया है। यह घटनाक्रम दक्षिण-पूर्वी एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है।

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