वर्तमान में शिक्षा प्रणाली को लेकर सरकारी स्तर पर गहन विचार-विमर्श चल रहा है। नई सरकार के गठन के बाद, बच्चों के लिए उपयुक्त विषयों और देश के विकास के लिए आवश्यक शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने मीडिया में इस विषय पर कई बार अपनी राय व्यक्त की है। मुख्य उद्देश्य छात्रों को परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने, नौकरी पाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए तैयार करना है। दर्शनशास्त्र को अनिवार्य विषय बनाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि छात्रों में चिंतन और विश्लेषण की क्षमता विकसित हो सके। यह कदम शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है। सरकार जल्द ही इस संबंध में निर्णय ले सकती है।