सड़क पर हुई एक दुर्घटना में, एक घायल व्यक्ति को मदद की ज़रूरत थी, लेकिन आसपास जमा लोगों ने सहायता करने के बजाय वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर अपलोड करने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखाई। घटनास्थल पर मौजूद भीड़ में ज़्यादातर लोगों के हाथों में मोबाइल फोन थे, और वे घटना को रिकॉर्ड कर रहे थे। यह घटना केवल सड़क दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं है; आग लगने, नदी में डूबने, हमले या सड़क पर बीमार पड़ने जैसी स्थितियों में भी यही प्रवृत्ति देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समाज में घटती संवेदनशीलता और त्वरित लाभ की मानसिकता को दर्शाता है। इस तरह के व्यवहार से घायल व्यक्ति की जान जाने का खतरा बढ़ सकता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे दूसरों की मदद करने को प्राथमिकता दें और वीडियो बनाने से बचें। यह घटना सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों पर सवाल खड़े करती है।