संसदीय कानूनी मामलों की समिति ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता में कई संशोधन मंजूर किए हैं। इन संशोधनों के तहत, अभिरक्षा की 72 घंटे की अवधि को अब दो अलग-अलग न्यायिक स्तरों पर चुनौती दी जा सकती है। पहले, अभिरक्षा आदेश को केवल एक बार चुनौती दी जा सकती थी। नए नियमों के अनुसार, अभियोजन पक्ष के हिरासत आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए अब दो अवसर मिलेंगे। यह बदलाव नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मनमानी गिरफ्तारी को रोकने में मदद मिलेगी। यह संशोधन कानून को अंतिम रूप देने से पहले संसद में मतदान के लिए जाएगा।