फिल्म ‘द फ्यूरियस’ एक एक्शन थ्रिलर है जो तकनीकी रूप से कुशल होने के बावजूद, अपनी कहानी को बहुत जल्दी बता देती है। फिल्म का कथानक शुरुआती पंद्रह मिनटों में ही समाप्त हो जाता है, जिसके बाद लगातार हिंसा, रक्तपात और यातना के दृश्यों का एक अंतहीन चक्र चलता रहता है। फिल्म समीक्षक फ्रेडरिक साहलिन के अनुसार, यह फिल्म जल्द ही उबाऊ लगने लगती है। फिल्म में मार-धाड़ तो बहुत है, लेकिन कहानी और भावनात्मक गहराई का अभाव है। यह एक ऐसा अनुभव है जो देखने वाले को थका देता है और अंततः निराशाजनक लगता है। कुल मिलाकर, ‘द फ्यूरियस’ एक खोखला और थकाऊ एक्शन फिल्म है जो अपनी हिंसा के बावजूद दर्शकों को बांधने में विफल रहती है।