बोधना सिवानंदन, एक 11 वर्षीय ब्रिटिश लड़की, ने शतरंज में असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। वह अब तक की सबसे कम उम्र की महिला ग्रैंडमास्टर बन गई हैं। उल्लेखनीय रूप से, बोधना ने खुद से शतरंज खेलना सीखा, बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के। छह साल पहले उन्होंने इस खेल को सीखना शुरू किया था और तब से उनकी प्रगति अद्भुत रही है। यह उपलब्धि शतरंज की दुनिया में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और युवा पीढ़ी को प्रेरित कर सकती है। बोधना सिवानंदन की यह सफलता ब्रिटेन में शतरंज के लिए एक उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करती है। उनकी प्रतिभा और समर्पण उन्हें भविष्य में और भी बड़ी ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।