तंजानिया के 'डेली न्यूज़' में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, अफ्रीकी देश दशकों से अपनी आर्थिक स्थिति के आकलन के लिए मूडीज़, स्टैंडर्ड एंड पूअर्स और फिच रेटिंग्स जैसी अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों पर निर्भर रहे हैं। लेख में सवाल उठाया गया है कि क्या ये रेटिंग निष्पक्ष मूल्यांकन प्रदान करती हैं या आर्थिक नियंत्रण में एक आधुनिक अंधापन दर्शाती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्भरता के कारण अफ्रीकी राष्ट्रों की वित्तीय संप्रभुता सीमित हो गई है। अब अफ्रीकी देशों को अपनी आर्थिक नीतियों को स्वयं निर्धारित करने और बाहरी रेटिंग के प्रभाव को कम करने की आवश्यकता है। यह लेख अफ्रीका के लिए वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने और अपनी आर्थिक नियति को नियंत्रित करने के महत्व पर जोर देता है। रेटिंग एजेंसियों की भूमिका पर पुनर्विचार करने और वैकल्पिक मूल्यांकन विधियों को विकसित करने की वकालत की जा रही है। इस बदलाव से अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं को अधिक स्थिरता और विकास की संभावना मिल सकती है।