जिलियन लिम ने अपने जीवन में शरीर को लेकर लगातार आलोचना का सामना किया है। बचपन में उन्हें ज़्यादा खाने के लिए कहा जाता था, जबकि किशोर अवस्था में लोग उन्हें एनोरेक्सिक समझने की भूल करते थे। अब, अपने 30 के दशक में थोड़ा वजन बढ़ने के बाद भी उन्हें अपने शरीर का बचाव करना पड़ रहा है। जिलियन बताती हैं कि समाज हमेशा से ही उनके शरीर पर सवाल उठाता रहा है, चाहे उनका वजन कम हो या ज़्यादा। यह घटना दर्शाती है कि शरीर की आलोचना एक निरंतर चलने वाली समस्या है जो किसी के वजन में बदलाव से खत्म नहीं होती। जिलियन का अनुभव दिखाता है कि लोगों की नज़रों में 'सही' शरीर का पैमाना लगातार बदलता रहता है, जिससे व्यक्ति हमेशा असुरक्षित महसूस कर सकता है। यह कहानी शरीर के प्रति सकारात्मकता और स्वीकृति की आवश्यकता पर ज़ोर देती है।

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