तेल अवीव विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एक नई विधि फेफड़ों के कैंसर का शीघ्र निदान करने में मदद कर सकती है। यह विधि डीएनए में रासायनिक निशानों का पता लगाती है, बिना आनुवंशिक अनुक्रमण के। यह स्वस्थ रोगियों को स्टेज 2 से 4 के कैंसर से पीड़ित रोगियों से सफलतापूर्वक अलग करने में सक्षम है। यह रक्त परीक्षण कैंसर के निदान और उपचार को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने की क्षमता रखता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक व्यापक रूप से उपलब्ध और सस्ती हो सकती है। इससे कैंसर रोगियों के लिए शीघ्र हस्तक्षेप और बेहतर परिणाम संभव हो सकते हैं। यह एक महत्वपूर्ण सफलता है जो फेफड़ों के कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक नया अध्याय खोल सकती है।

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