उरुग्वे के कोच मार्सेलो Bielsa ने फ़ीफ़ा द्वारा लागू किए गए 'कूलिंग ब्रेक' (पानी पीने के लिए ठहराव) पर अपनी असहमति व्यक्त की है। उनका मानना है कि ये ब्रेक खेल की गति और लय को बाधित करते हैं, और खेल की सांस्कृतिक महत्ता को कम करते हैं। Bielsa का कहना है कि ये ठहराव मैच में कोई अतिरिक्त मूल्य नहीं जोड़ते हैं। उन्होंने इस पहल को खिलाड़ियों की थकान से निपटने के बेहतर तरीकों की खोज के बजाय, एक अनावश्यक हस्तक्षेप बताया है। कोच Bielsa ने खेल की पारंपरिक प्रकृति और खिलाड़ियों की सहनशक्ति के महत्व पर ज़ोर दिया। उनका मानना है कि खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुकूल ढलना चाहिए, न कि खेल को उनकी सुविधा के अनुसार बदलना चाहिए। फ़ीफ़ा ने खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह नियम लागू किया है, लेकिन Bielsa जैसे अनुभवी कोचों की आलोचना से इस पहल पर पुनर्विचार की मांग उठ सकती है।