दक्षिण ऑस्ट्रेलिया सरकार और बीएचपी के बीच हुए नए खनन समझौते को लेकर पर्यावरणविदों और आदिवासी समूहों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह समझौता ग्रेट आर्टेशियन बेसिन से जल दोहन को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाता है। वहीं, राज्य सरकार का दावा है कि इस समझौते में पर्यावरण संबंधी सख्त नियम लागू किए गए हैं। आलोचकों का तर्क है कि समझौता बेसिन के जल स्तर को खतरे में डाल सकता है और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। सरकार का कहना है कि जल संसाधनों की निगरानी और संरक्षण के लिए उपाय किए गए हैं। यह मुद्दा जल प्रबंधन और खनन गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता को उजागर करता है। इस समझौते पर आगे भी बहस जारी रहने की संभावना है।
