बर्लिन के CSD (क्रिश्चियन सेंट्रेल सर्विस डे) पर हुए हमले के हमलावर अब्दुल बलूत एक कुख्यात अपराधी थे, जिनकी पुलिस और अदालतों को पहले से जानकारी थी। वह छोटे-मोटे अपराधों और मारपीट के लिए जाने जाते थे। अधिकारियों और न्यायपालिका को उसके कट्टरपंथी विचारों के बारे में भी पता था। सवाल यह है कि उसे रोकने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया? जांच से पता चला है कि सुरक्षा एजेंसियों को इस खतरे का आभास था, लेकिन कार्रवाई करने में विफल रहीं। यह घटना जर्मनी में सुरक्षा व्यवस्था और चरमपंथी विचारधाराओं से निपटने की क्षमताओं पर गंभीर सवाल उठाती है। इस मामले में गहन जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि चूक कहां हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।