बर्लिन में प्राइड परेड पर हुए इस्लामी आतंकवादी हमले को जर्मनी के लोकतंत्र के खिलाफ युद्ध की घोषणा के रूप में देखा जा रहा है। पूरा शहर शोक में डूबा है, वहीं आक्रोश भी बढ़ रहा है। सवाल यह है कि एक ज्ञात, हिंसक Islamist कैसे रिहा हो गया और इसने कैसे दक्षिणपंथी AFD पार्टी को फिर से ताकत दी। यह घटना जर्मनी की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जांच एजेंसियां इस बात की छानबीन कर रही हैं कि आतंकवादी को निगरानी में रखने के बावजूद, वह हमला करने में कैसे सफल रहा। इस हमले ने जर्मनी में आप्रवासन और सुरक्षा नीतियों पर भी बहस तेज कर दी है। AFD जैसी चरमपंथी पार्टियों को इस घटना का फायदा उठाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।