बर्लिन में हुए हमले के संदिग्ध को पहले से ही एक "इस्लामी खतरे" के रूप में जाना जाता था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह पैरोल पर रिहा था। अतीत में, वह सीरिया जाने और आईएसआईएस में शामिल होने का प्रयास कर चुका था। यह जानकारी सुरक्षा एजेंसियों के बीच पहले से मौजूद थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इससे हमले को कैसे रोका जा सकता था। जांचकर्ता यह निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हमले और उसके पूर्व के चरमपंथी रुझानों के बीच कोई सीधा संबंध है। इस घटना से जर्मनी में सुरक्षा उपायों पर सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे भविष्य में ऐसे खतरों को रोकने के लिए अपनी निगरानी और प्रतिक्रिया प्रक्रियाओं को मजबूत करेंगे।