यह कहानी बर्गन के एक ऐसे खिलाड़ी की है जिन्होंने युद्ध-पूर्व समय में विश्व कप में अपनी पहचान बनाई थी। वे बर्गन के आखिरी व्यक्ति थे जिन्होंने विश्व कप में हिस्सा लिया था, जिसके बाद 88 वर्षों तक कोई अन्य स्थानीय खिलाड़ी वहां नहीं पहुंचा। खेल के मैदान पर उनकी उपलब्धियों के बावजूद, उनका व्यक्तिगत जीवन काफी कठिन रहा। वर्ष 1977 में, उनकी मृत्यु एक दुखद और हिंसक घटना में हुई। यह घटना 'ब्लड सिटी' (Blodbyen) के नाम से चर्चित स्थान पर घटी थी। एक समय के खेल नायक का अंत इस तरह होना अत्यंत दुखद था। यह विवरण उनके गौरवशाली खेल करियर और उनके जीवन के दुखद अंत के बीच के विरोधाभास को दर्शाता है।
