पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेंट ने हाल ही में बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान धार्मिक समूहों की सेना में भर्ती क्यों नहीं की। उनका कहना है कि उन्होंने राजनीतिक गठबंधन बनाए रखने की कोशिश की, क्योंकि धार्मिक समूहों को सेना में शामिल करने का मुद्दा विवादास्पद था। बेंट का मानना ​​था कि इस मुद्दे पर जोर देने से सरकार गिर सकती थी। उन्होंने इस फैसले को राजनीतिक वास्तविकता के अनुरूप बताया। उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर उनकी कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं थी, बल्कि सरकार की स्थिरता को प्राथमिकता दी गई। बेंट का यह बयान इस्राइल में धार्मिक समूहों की सेना में भर्ती को लेकर चल रही बहस के बीच आया है।