‘সারেং বৌ’ बंगला साहित्य का एक प्रसिद्ध और यथार्थवादी उपन्यास है। यह समुद्र तट के पास रहने वाले वंचित लोगों के जीवन संघर्ष को दर्शाता है। कहानी ग्रामीण समाज की रूढ़िवादी मान्यताओं, शक्ति के दुरुपयोग और एक महिला की गरिमा एवं पवित्रता की रक्षा के लिए उसके अकेले संघर्ष पर केंद्रित है। उपन्यास में तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था में महिलाओं की चुनौतियों और उनके साहस को उजागर किया गया है। यह कृति मानवीय मूल्यों और सामाजिक अन्याय के खिलाफ एक शक्तिशाली आवाज है। ‘সারেং বৌ’ साहित्य प्रेमियों के बीच अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है और आज भी पाठकों को प्रेरित करती है। यह उपन्यास बंगाल के ग्रामीण जीवन का एक जीवंत चित्रण प्रस्तुत करता है।
