यह कहानी एक पुराने साहित्यिक संबंध और प्रेम की प्रकृति पर आधारित है। एक व्यक्ति किसी लेखक के पुराने लेख से बहुत प्रभावित था और तुरंत उनके करीब आ गया। चर्चा में, वे प्रेम और अपेक्षाओं के बीच के संबंध पर बात करते हैं। लेखक का मानना है कि प्रेम के सामने कोई अपेक्षा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि प्रेम अपने तरीके से प्रतिफल देता है। अपेक्षाएँ आने पर प्रेम दूर हो जाता है, और गहरी अपेक्षाएँ प्रेम को तोड़ सकती हैं। यह एक संक्षिप्त लेकिन विचारोत्तेजक संवाद है जो प्रेम की जटिलताओं को उजागर करता है। कहानी में लेखक की दो लघु कथाओं का भी उल्लेख है जो इस विषय पर आधारित हैं।