बवेरिया के प्रधानमंत्री मार्कस सोडर ने यूक्रेन से आए बेरोज़गार शरणार्थियों को मिलने वाली सामाजिक सहायता राशि बंद करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने जर्मनी में निर्वासितों की संख्या में वृद्धि करने की भी वकालत की है। सोडर का कहना है कि जो यूक्रेनी नागरिक काम करने में सक्षम हैं, उन्हें अब वित्तीय सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यह कदम जर्मनी में आप्रवासन और सामाजिक सुरक्षा नीतियों पर चल रही बहस के बीच आया है। आलोचकों का तर्क है कि यह प्रस्ताव मानवीय मूल्यों के खिलाफ है और यूक्रेन में युद्ध के कारण उत्पन्न मानवीय संकट को अनदेखा करता है। सोडर की पार्टी, सीएसयू, बवेरिया में एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति है और उनकी इस मांग से जर्मनी की आप्रवासन नीति में बदलाव की संभावना बढ़ गई है। इस मामले पर आगे प्रतिक्रियाओं और सरकारी रुख का इंतजार किया जा रहा है।