एक बैंक मैनेजर को निजी इस्तेमाल के लिए कंपनी की गाड़ी चलाने के कारण बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि, अदालत ने मैनेजर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को लगभग 77,000 यूरो का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। यह मामला जर्मनी में सामने आया है, जहाँ मैनेजर ने अपनी सेवा के दौरान कंपनी की गाड़ी का निजी उपयोग किया था। बर्खास्तगी के बाद, मैनेजर ने अदालत में चुनौती दी और दावा किया कि उसे अनुचित तरीके से बर्खास्त किया गया था। अदालत ने मैनेजर के तर्कों को सही मानते हुए कंपनी को मुआवज़ा देने का आदेश दिया। इस फैसले से पता चलता है कि कर्मचारियों के अधिकारों का संरक्षण महत्वपूर्ण है, भले ही उन्होंने कंपनी की नीतियों का उल्लंघन किया हो। यह मामला कंपनियों को अपनी नीतियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने और कर्मचारियों के साथ उचित व्यवहार करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है।