सिराजगंज मित्रमंडल ने ‘पद्मा नदी के माझी’ उपन्यास पर एक पाठचक्र का आयोजन किया। इस चर्चा में उपन्यास की कहानी, पात्रों और मछुआरों के जीवन संघर्ष पर विस्तृत रूप से विचार-विमर्श किया गया। गरीबी, मानवीय मूल्य और सामाजिक वास्तविकता जैसे विषयों पर भी गहरी बातचीत हुई। प्रतिभागियों ने कुबेर, कपिला और हुसैन मिया के पात्रों के माध्यम से आशा-निराशा, जीवन की कठिनाइयों और अस्तित्व के संघर्ष को दर्शाने के उपन्यास के चित्रण पर अपनी राय रखी। यह कार्यक्रम साहित्य प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था, जहाँ विचारों का आदान-प्रदान हुआ और उपन्यास की गहरी समझ विकसित हुई। आयोजनकर्ताओं ने भविष्य में भी इसी तरह के साहित्यिक कार्यक्रमों को जारी रखने की योजना व्यक्त की।

English
Français
Español
हिन्दी
中文