चित्रপাড় में बिताई एक सर्द रात के बारे में यह कहानी है। लेखक को दूसरे तल के एक कमरे में सोने की जगह दी गई थी। कमरे में ठंड बहुत थी, लेकिन लेखक ने कंबल या लिहाफ के बजाय केवल कपड़ों और ऊनी टोपी पहनकर सोने का नाटक किया। पाटी पर रखे कपड़ों, मोजों और टोपी के नीचे, लेखक ने ठंड से बचने की कोशिश की। यह कहानी उस समय के ग्रामीण जीवन और साधारण परिस्थितियों में भी आराम पाने के साहस को दर्शाती है। यह एक शांत और चिंतनशील अनुभव था, जो लेखक के दिल में बस गया। यह कहानी सर्द रात की मुश्किलों और उस समय के जीवन की सादगी को उजागर करती है।