सरकार ने रिकॉर्ड राजस्व घाटे, उच्च मुद्रास्फीति, निवेश में ठहराव, कमजोर बैंकिंग क्षेत्र और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश के इतिहास का एक महत्वाकांक्षी बजट प्रस्तुत किया है। 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए 9.38 लाख करोड़ रुपये का यह बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि संकट से उबरने की राजनीतिक और आर्थिक प्रतिबद्धता भी है। अर्थशास्त्रियों, व्यापारियों और नीति निर्माताओं का एक बड़ा वर्ग इस बजट को चुनौतीपूर्ण मानता है। बजट में विकास को गति देने और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि इस बजट के माध्यम से आर्थिक स्थिरता हासिल की जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करना आसान नहीं होगा और इसके लिए सरकार को कड़ी मेहनत करनी होगी। यह बजट सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा है।