विपक्षी सांसद नाजिब मोमेन ने देश की बैंकिंग प्रणाली की नाजुक स्थिति, कानून-व्यवस्था में गिरावट और संविधान में 'जुलाई घोषणापत्र' तथा जनमत संग्रह के फैसले को लागू करने के प्रयासों पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सत्ताधारी दल के कुछ सदस्य फासीवादी तरीके से फिर से जमात-उल-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। मोमेन ने इस मांग को फासीवादी तौर-तरीकों की पुनरावृत्ति बताया। उन्होंने मस्जिदों पर नियंत्रण स्थापित करने के प्रयासों पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठाने चाहिए। मोमेन ने सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। यह मुद्दा संसद में गरमा सकता है क्योंकि विपक्षी दल इस मामले को उठाने की तैयारी कर रहे हैं।