गृह मंत्री सैफुद्दीन ने कहा है कि रिमांड या जमानत जैसे फैसले न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेट्स द्वारा कानून के अनुसार लिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मामलों में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है, और यह पूरी तरह से न्यायपालिका का अधिकार क्षेत्र है। सैफुद्दीन ने यह भी कहा कि किसी भी आरोपी को जमानत पर रिहा करना या रिमांड पर भेजना, अदालत के विवेक पर निर्भर करता है। यह निर्णय संबंधित कानूनों के तहत लिया जाता है, जिसमें मामले की गंभीरता और आरोपी के अपराध इतिहास जैसे कारकों पर विचार किया जाता है। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जोर दिया। यह बयान उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहां आरोपी की रिहाई या हिरासत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अंततः, अदालतें ही यह तय करेंगी कि किसी को रिमांड पर रखना है या जमानत पर रिहा करना है।

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