बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर विदेशी ऋण का दबाव बढ़ रहा है। देश को मिलने वाली नई विदेशी सहायता का लगभग पूरा हिस्सा पुराने ऋणों की किश्तों और ब्याज चुकाने में चला जा रहा है। इससे विकास कार्यों के लिए उपलब्ध नई धनराशि में तेज़ी से कमी आ रही है। नए ऋण और अनुदान की प्रतिबद्धताएँ और उनका वितरण, दोनों ही घट रहे हैं। विदेशी वित्तपोषण पर निर्भर विकास परियोजनाओं को इसका सीधा असर झेलना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति देश की आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकती है। सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए नए उपाय तलाश रही है।
