इंडोनेशिया की राष्ट्रीय अनुसंधान और नवाचार एजेंसी (BRIN) ने बाली के ‘सुबाक’ कृषि प्रणाली को टिकाऊ कृषि के एक वैश्विक उदाहरण के रूप में बढ़ावा दिया है। ‘सुबाक’ एक पारंपरिक बालीनीज़ चावल सिंचाई प्रणाली है जो सदियों से चली आ रही है। यह प्रणाली न केवल चावल की खेती के लिए पानी का कुशल प्रबंधन करती है, बल्कि सामाजिक सामंजस्य और धार्मिक अनुष्ठानों को भी बढ़ावा देती है। BRIN का कहना है कि ‘सुबाक’ पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों का एक उत्कृष्ट मॉडल है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है। इस प्रणाली को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है, जो इसकी वैश्विक मान्यता का प्रमाण है। BRIN अब ‘सुबाक’ के सिद्धांतों को अन्य क्षेत्रों में लागू करने के तरीकों की तलाश कर रहा है ताकि टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दिया जा सके। यह प्रणाली बाली की संस्कृति और पर्यावरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
