एक नए अध्ययन से पता चला है कि शिशु भाषा, जिसे अक्सर 'बेबी टॉक' या 'तपते' के रूप में जाना जाता है, वास्तव में बच्चों को भाषा सीखने में मदद करती है। यह धारणा कि शिशु भाषा बच्चों के विकास को धीमा कर देती है, गलत साबित हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, शिशु भाषा बच्चों का ध्यान आकर्षित करती है और उन्हें ध्वनियों को पहचानने में मदद करती है। यह भाषा सीखने की प्रक्रिया को सुगम बनाती है, खासकर शुरुआती चरणों में। इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, शिशु भाषा का उपयोग करने से बच्चे भाषा के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। यह बच्चों को शब्दों और वाक्यों के बीच अंतर समझने में भी मदद करती है। इस तकनीक का उपयोग माता-पिता और देखभाल करने वाले बच्चों के साथ संवाद करते समय कर सकते हैं।