सितंबर महीने में, युद्ध का दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु सामने आया, जिसका वित्तीय बाजारों पर प्रभाव पड़ा। हर्मुज़ के बाद, बाब अल-मंडब क्षेत्र में हौथियों ने यमन के पास जहाजों पर कब्ज़ा कर लिया, जिससे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई। इस स्थिति ने वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। साथ ही, ब्याज दरों में भी वृद्धि देखी गई है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े खतरों के बारे में भी चेतावनियाँ जारी की जा रही हैं, जिसके कारण तकनीकी क्षेत्र में भी सावधानी बरती जा रही है। यह सब मिलकर वित्तीय बाजारों पर दबाव बना रहे हैं और आगे की दिशा अनिश्चित बनी हुई है। विशेषज्ञ सावधानी बरतने और बाजार की स्थितियों पर कड़ी निगरानी रखने की सलाह दे रहे हैं।