दुनिया भर में एक बार फिर से सत्तावादी विचारधाराओं का उदय हो रहा है। ऐसे नेता जो पहले मृत माने जाते थे, अब सत्ता में आ रहे हैं और हिंसा तथा विभाजनकारी भाषणों के माध्यम से इसे हथिया रहे हैं। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक गंभीर खतरा है। फिर भी, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सत्तावाद अजेय नहीं है। विशिष्ट परिस्थितियों और समाज की वैध ताकतों के माध्यम से इसे हराया जा सकता है। सामूहिक प्रयासों और प्रतिरोध से ही इस खतरे का सामना किया जा सकता है। आशा है कि नागरिक समाज और लोकतांत्रिक संस्थाएं मिलकर इस चुनौती का सामना करेंगी।