ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने अपनी ग्रीष्मकालीन यात्रा के दौरान एक महिला से बातचीत में कहा कि "परिवार का मतलब है बिना किसी बदले कुछ करना" और "बच्चों की देखभाल काम नहीं है"। इस बयान ने भारी आलोचना को जन्म दिया है। चांसलर के इस विचार को असंवेदनशील और पितृसत्तात्मक माना जा रहा है, क्योंकि यह मातृत्व के महत्व और महिलाओं द्वारा किए जाने वाले अनौपचारिक श्रम को कम आंकता है। विपक्षी दलों और महिला अधिकारों के कार्यकर्ताओं ने इस बयान की कड़ी निंदा की है। उनका तर्क है कि बच्चों की देखभाल एक महत्वपूर्ण कार्य है जिसके लिए समय, ऊर्जा और समर्पण की आवश्यकता होती है। स्टॉकर के बयान ने ऑस्ट्रिया में लिंग समानता और परिवार नीति पर बहस को फिर से शुरू कर दिया है। यह घटना दर्शाती है कि समाज में अभी भी मातृत्व और पितृत्व की भूमिकाओं को लेकर रूढ़िवादी दृष्टिकोण मौजूद हैं।