प्रधानमंत्री ने हाल ही में देश में चल रहे सूखे के लिए अपने पूर्ववर्तियों की नीतियों को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि पिछले छत्तीस वर्षों में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। प्रधानमंत्री के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, विपक्ष ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सूखे की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर बुरा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं। सरकार ने स्थिति को सुधारने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की आवश्यकता है।

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