ऑस्ट्रेलिया सरकार अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को दूसरे वीजा के लिए विदेश जाने के लिए मजबूर करेगी, जिससे अस्थायी आप्रवासियों को देश छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। यह कदम प्रधानमंत्री टेलर द्वारा वन नेशन पार्टी को चुनौती देने के लिए उठाया गया है। सरकार का लक्ष्य माइग्रेशन को दो-तिहाई तक कम करना है। इस नई नीति से ऑस्ट्रेलिया में आने वाले छात्रों और श्रमिकों की संख्या में भारी गिरावट आने की संभावना है। सरकार का तर्क है कि यह कदम ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाएगा। आलोचकों का कहना है कि यह नीति ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगी और कौशल की कमी पैदा करेगी। यह परिवर्तन ऑस्ट्रेलिया की आव्रजन प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।