सरकार ने मितव्ययिता उपायों को लागू किया है, जिसका उद्देश्य वित्तीय बोझ को समान रूप से वितरित करना और कुछ क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना है। यह कदम सभी पर समान रूप से प्रभाव नहीं डालेगा। आलोचकों का कहना है कि यह केवल खर्चों में कटौती करने जैसा है, लेकिन सरकार का तर्क है कि यह एक संतुलित दृष्टिकोण है। इन उपायों से कुछ क्षेत्र लाभान्वित होंगे, जबकि कुछ को नुकसान उठाना पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम होंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये उपाय दीर्घकाल में कितने प्रभावी साबित होते हैं। इस पैकेज से कौन से क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।